Friday, May 6, 2016

किसान कितनी ही बदमाशी करले लेकिन गेहूं बो कर चना पैदा नहीं कर सकता। यह जिंदगी में भी है।

दादा  की बात चली तो एक बात और याद आ गई। उनकी ये बात मुझे भी बहुत पसंद है दूर से। मैं कोई तोपची नहीं हूं। वर्ना में कहता कि इस बात को मैं हथियार बनाकर जीता हूं। दादा कहते थे कि किसान कितना भी होशियार हो जाए। चाहे कितना उन्नत बीज जमीन में डाल दे। कितना अच्छी ही रसायन इस्तेमाल करे। खूब पानी दे। यानि सारे उपाय करले फिर भी वह यह करिश्मा नहीं कर सकता कि वह गेहूं बो कर चना पैदा कर ले। वे कहते थे और यही बात जिंदगी में भी सही है। जिस तरह से किसान जो भी बीज बोता है। वही काटता है। जीवन में भी हम यह बात अक्सर भूल जाते है कि जो हम करते है। वही हमारे सामने  आता है। लेकिन उलट है। हम बो कुछ भी लेते  है. लेकिन काटते वक्त हम उम्मीद करते है कि हमें वहीं  मिले जो हमारी इच्छा है। लेकिन ये कहां होता है। 

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